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Tag Archives: Solan

हिमनद या फिर हिमानी, बस्ते जहां भोले बर्फानी, नदियां करती कल कल, यही है मेरा हिमाचल, भोले यहाँ के लोग, मीठे उनके बोल, जहां खुशियाँ हैं हरपाल, यही है मेरा हिमाचल, पहाड़ों से वीर यहाँ, इसके जैसा स्वर्ग कहाँ, देव बसते हैं जहां आकर, यही है मेरा हिमाचल, सेब-नाशपती के बाग, या सारसो का साग, हरकुछ मेल यहाँ पर, यही है मेरा हिमाचल, धाम यहाँ की पहचान, और सिड्डु का भी है नाम, दिल मोहते फूल और फल, यही है मेरा हिमाचल, कांगड़ा मंडी या शिमला किन्नौर , सोलन हमीरपुर देश के सिरमौर, तत्पर है सूरज नया उगने को कल, यही है मेरा हिमाचल, ऊना बिलासपुर की अब लोर, चले नई किरण की ओर, कुल्लू चंबा स्पीति लाहुल, यही है मेरा हिमाचल, यही है मेरा हिमाचल!!!! यह कविता ऋषभ शर्मा द्वारा लिखी गई है। साथ ही इस कविता में उपस्थित चित्र भी उन्होंने ही उपलब्ध कराए हैं। हमें उम्मीद है कि आपको यह कविता पसंद आई होगी।  

हिमाचल में विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बहुमत  प्राप्त हुआ है, साथ ही बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के चेहरे प्रेम कुमार धूमल अपनी सीट से हार चुके हैं। इसी के साथ ही बीजेपी में हिमाचल प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर अभी तक संशय था। जीत के चार दिन बाद भी अभी तक मुख्यमंत्री के नाम पर सहमति नही बना पाई। हिमाचल पार्टी प्रभारी मंगल पांडेय ने पिछले ही शिमला में भाजपा विधायक दल के साथ  बैठक की। इस बैठक में बीजेपी पार्टी हाई कमान कि और से पार्टी पर्यवेक्षक निर्मला सीतारमण और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी उपस्थित थे , वहीं प्रेम कुमार धूमल ने जय राम ठाकुर के नाम पर सहमति जताई गई थी। हालांकि सीएम पद कि रेस में सबसे आगे नाम जय राम ठाकुर का चल रहा था। पांच दिन के बाद आखिरकार बीजेपी ने मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर दिया गया।…

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चूड़धार पर्वत हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित है। चूड़धार पर्वत समुद्र तल से 11965 फीट(3647 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है । यह पर्वत सिरमौर जिले और बाहय हिमालय(Outer Himalayas) की सबसे ऊंची चोटी है। सिरमौर ,चौपाल ,शिमला, सोलन उत्तराखंड के कुछ सीमावर्ती इलाकों के लोग इस पर्वत में धार्मिक आस्था रखते हैं। चूड़धार को श्री शिरगुल महाराज का स्थान माना जाता है। यहां शिरगुल महाराज का मंदिर भी स्थित है। शिरगुल महाराज सिरमौर व चौपाल के देवता है।  चूड़धार कैसे पहुंचा जाए ? चूड़धार पर्वत तक पहुंचने के दो रास्ते हैं। मुख्य रास्ता नौराधार से होकर जाता है तथा यहां से चूड़धार 14 किलोमीटर है। दूसरा रास्ता सराहन चौपाल से होकर गुजरता है। यहां से चूड़धार 6 किलोमीटर है। मंदिर से जुड़ी मान्यता इस मंदिर के बनने के पीछे एक पुराणिक कहानी जुड़ी है‌। मान्यता है कि एक बार चूरू नाम का शिव भक्त, अपने पुत्र के…

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हिमाचल प्रदेश को देवभूमि भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां पर बहुत सारे देवी देवताओं के मंदिर है। जिनका अपना एक पुराना इतिहास है। यही कारण है कि हिमाचल प्रदेश अपनी वास्तु कला के लिए भी प्रसिद्ध है। वास्तु कला में हिमाचल प्रदेश को मंदिर की छत के आकार के आधार पर स्तूपाकार, शिखर, गुंबदाकार, पगौड़ा , बंदछत शैली और समतल शैली में बांटा गया है। 1) स्तूपाकार शैली Image Source इस शैली में बने अधिकतर मंदिर शिमला जिले में स्थित है। शिमला के हाटकोटी के राजेश्वरी मंदिर और शिव मंदिर को इस शैली मे बनाया गया है। जुब्बल क्षेत्र में अधिकतर मंदिर की शैली के बने हैं। ‌2) शिखर शैली   इस शैली से बने मंदिरों की छत का उपरी हिस्सा पर्वत की तरह चोटीनुमा होता है ।कांगड़ा जिले के बहुत से मंदिर इस शैली में बने हैं। कांगड़ा का मशहूर मसरूर रॉक कट मंदिर भी इसी शैली में बना है।…

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Solan came into existence on 1st September 1972. With an area of 1936 square kilometres, Solan is placed at 9th out of 12 districts in terms of area occupied and is 4th in terms of population which is approximately equal to 576670. Solan district was carved out by combining Solan and Arki Tehsils former Mahasu district and Kandaghat in Nalagarh tehsils of the former Shimla district. The name Solan comes from the local deity Shoolini Devi, which is believed to save Solan from being destroyed. The Solan district comprises of 5 tehsils which includes Kasauli, Nalagarh, Arki, Kandaghat and district headquarter Solan. Solan district is surrounded by Sirmour, Shimla, Mandi and Bilaspur districts and the states of Punjab and Haryana. Pahadi Giddha or Paruhan is the traditional dance of Solan District and is originally from Kunihar, which can be called the cultural capital of the region. A historical dance called Thodo, based…

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