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Tag Archives: Sirmour

13वी विधानसभा चुनाव में पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इस चुनाव में करीब 50 लाख मतदाताओं में से 37 लाख मतदाताओं ने अपने अधिकार का इस्तेमाल किया। जो कि लगभग 75% रहा। इस चुनाव में 337 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाइए। कुछ मतदान केंद्रों पर शाम 5 बजे के बाद भी मतदाताओं की कतारें देखने को मिली। वहीं कुछ जगहो पर ईवीएम में गड़बडी के कुछ मामले सामने आए। जानिए हर जिले में कितना प्रतिशत मतदान हुआ: सिरमौर जिला में प्रदेश में सबसे अधिक 82% मतदान हुआ। सोलन में 77.4% ऊना 76% कुल्लू 77.% किन्नौर 75% बिलासपुर 75% चंबा 74% मंडी 75% शिमला 72.5% लाहौल स्पीति 73.4% कांगड़ा 72% हमीरपुर 69.50% लगाता समाचार पाने के लिए हमारे facebook group onehimachal से जुड़िए । जनता का चुनाव में इतना बढ़-चढ़कर भाग लेना एक जागरूक समाज की निशानी है। लोगों को यह भली-भांति पता है कि उनके मत का कितना महत्व है। अब देखना…

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हिमाचल प्रदेश की समुद्र तल से ऊंचाई 350 मीटर से 7,000 मीटर के बीच के लगभग है। हिमाचल प्रदेश को तीन प्रकार की पर्वत श्रृंखलाओं में बांटा गया है। 1. निम्न पर्वत श्रेणी – इस पर्वत श्रेणी को शिवालिक पर्वत के नाम से भी जाना जाता है। शिवालिक शब्द का अर्थ है शिव की जटाएं । इस क्षेत्र की समुद्र तल से ऊंचाई 350 मीटर से 1500 मीटर तक है। प्राचीन काल में शिवालिक पर्वत को मानक पर्वत के नाम से जाना जाता था। इस क्षेत्र में औसत वार्षिक वर्षा 1500 mm से 1800 mm के बीच होती है। हिमाचल प्रदेश के निम्न पर्वत श्रेणी में कांगड़ा उना, हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी, सोलन और सिरमौर के निचले शेत्र आते आते हैं। 2. मध्य पर्वत श्रेणी– इस पर्वत श्रृंखला पर्वत श्रृंखला में सिरमौर जिले के रेणुका, मंडी जिला के करसोग, चंबा की चूराहा और कांगड़ा के ऊपरी भाग जैसे पालमपुर तहसील आदि शामिल…

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हिमाचल प्रदेश वीर सपूतों की भूमि रहीं हैं। आज भी हिमाचल से भारतीय सीमाओं की रक्षा के लिए और देश पर मर-मिटने के लिए हजारों लोग सेना में भर्ती होते हैं। भारत कई सदियों तक अंग्रेज़ो का गुलाम रहा। आज के दिन जब 1947 में भारत को आजादी मिली तो एक नये दौर की ओर भारत ने कदम रखें। इस आजादी को पाने के लिए हजारों देशवासियों ने अपना-अपना योगदान दिया। हिमाचल प्रदेश का उस समय आधिकारिक तौर पर अस्तित्व नहीं था पर यहां के क्रांतिकारी नेताओं, लेखक, कविओं इत्यादि ने उस दौर में अपनी अलग ही छाप छोड़ी थी। तो आज स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य पर हम उन्हीं कुछ स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानेंगे। बाबा कांशी राम: बाबाकांशी राम का जन्म 11 जुलाई 1882 को कांगड़ा जिले के देहरागोपिपुर कस्बे में हुआ था। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया था। उन्होंने केवल काले कपड़े पहनने का…

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हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या 68 लाख से ज्यादा है। हिंदी भाषा को आधिकारिक भाषा का सम्मान प्राप्त है तथा अंग्रेजी भाषा को अतिरिक्त आधिकारिक भाषा के रूप में जाना जाता है। अंग्रेज भाषाविद्वान G.A Grierson ने हिमाचली भाषाओं का पश्चिमी पहाड़ी भाषाओं के रूप में सर्वेक्षण किया पहाड़ी भाषा का अपभ्रश शौरसैनी है। पहाड़ी भाषा की लिपि टांकरी है। हिमाचल में 88.77% लोग( हिंदी पहाड़ी) बोलते हैं और 5.83% लोग पंजाबी बोलते हैं। पहाड़ी भाषा बोलने वालों की संख्या कम होती जा रही है तथा हम इस पर चर्चा करेंगे पर आइए पहले जानते है कि हर जिले में कौन सी तरह की पहाड़ी बोली जाती है। चंबा  चंबा जिले में चंम्बयाली बोली जाती है। चंबा जिले में स्थानीय बोलियां भी बोली जाती हैं जिनमें भटियाली , चुराही, पंगवाली और भरमौरी  है। बिलासपुर बिलासपुर जिले में मुख्य भाषा कहलूरी बोली जाती है। कहलूरी को बिलासपुरी भाषा भी कहा जाता है। यह भी पढ़े। जानिए हिमाचल प्रदेश की पर्वत…

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हिमाचल प्रदेश को देवभूमि भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां पर बहुत सारे देवी देवताओं के मंदिर है। जिनका अपना एक पुराना इतिहास है। यही कारण है कि हिमाचल प्रदेश अपनी वास्तु कला के लिए भी प्रसिद्ध है। वास्तु कला में हिमाचल प्रदेश को मंदिर की छत के आकार के आधार पर स्तूपाकार, शिखर, गुंबदाकार, पगौड़ा , बंदछत शैली और समतल शैली में बांटा गया है। 1) स्तूपाकार शैली Image Source इस शैली में बने अधिकतर मंदिर शिमला जिले में स्थित है। शिमला के हाटकोटी के राजेश्वरी मंदिर और शिव मंदिर को इस शैली मे बनाया गया है। जुब्बल क्षेत्र में अधिकतर मंदिर की शैली के बने हैं। ‌2) शिखर शैली   इस शैली से बने मंदिरों की छत का उपरी हिस्सा पर्वत की तरह चोटीनुमा होता है ।कांगड़ा जिले के बहुत से मंदिर इस शैली में बने हैं। कांगड़ा का मशहूर मसरूर रॉक कट मंदिर भी इसी शैली में बना है।…

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Dr.Yashwant Singh Parmar (4 August 1906 – 2 May 1981) was a leader of the Indian National Congress and the first Chief Minister of Himachal Pradesh. He was also the founder of the state Himachal Pradesh and therefore popularly referred as “Himachal Nirmaata“. He was born at Chanhalag village near Bagthan in a Rajput family in the erstwhile princely state of Sirmour. He studied in the Christian College in Lahore and later received his PhD from Lucknow University in 1944. Let us share “10 facts about Himachal Nirmaata Dr. Y.S. Parmar that you must know” 1. He was also a member of the prestigious Constituent Assembly. 2. His father, Bhandari Shivanand was an Urdu and Persian scholar of his time. 3. He led a Satyagraha Movement in Suket State which ultimately led for the formation of Himachal Pradesh in 1948. 4. He stepped down from the post of CM when Himachal…

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Sirmour is the southernmost district of Himachal Pradesh. It has an area of around 2,825 km².  According to the 2011 census, Sirmour district has a population of 530,164. This gives it a ranking of 542nd in India (out of a total of 640). The district has a population density of 188 inhabitants per square kilometre (490/sq mi) . Its population growth rate over the decade 2001-2011 was 15.61%. Sirmour has a sex ratio of 915 females for every 1000 males, and a literacy rate of 79.98%. Headquarter of Sirmour district is at Nahan, which is the fifth largest city of Himachal Pradesh. Now lets talk about “11 facts about Sirmour District that you probably don’t know” 1. Churdhar Peak is the highest peak in lower Himalayas with an elevation of approximate 3647 metres. 2. George Everest, after whom Mount Everest is named, made many astronomical readings and sightings of the Himalaya mountains…

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