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Tag Archives: Kinnaur

हिमनद या फिर हिमानी, बस्ते जहां भोले बर्फानी, नदियां करती कल कल, यही है मेरा हिमाचल, भोले यहाँ के लोग, मीठे उनके बोल, जहां खुशियाँ हैं हरपाल, यही है मेरा हिमाचल, पहाड़ों से वीर यहाँ, इसके जैसा स्वर्ग कहाँ, देव बसते हैं जहां आकर, यही है मेरा हिमाचल, सेब-नाशपती के बाग, या सारसो का साग, हरकुछ मेल यहाँ पर, यही है मेरा हिमाचल, धाम यहाँ की पहचान, और सिड्डु का भी है नाम, दिल मोहते फूल और फल, यही है मेरा हिमाचल, कांगड़ा मंडी या शिमला किन्नौर , सोलन हमीरपुर देश के सिरमौर, तत्पर है सूरज नया उगने को कल, यही है मेरा हिमाचल, ऊना बिलासपुर की अब लोर, चले नई किरण की ओर, कुल्लू चंबा स्पीति लाहुल, यही है मेरा हिमाचल, यही है मेरा हिमाचल!!!! यह कविता ऋषभ शर्मा द्वारा लिखी गई है। साथ ही इस कविता में उपस्थित चित्र भी उन्होंने ही उपलब्ध कराए हैं। हमें उम्मीद है कि आपको यह कविता पसंद आई होगी।  

Image Source चीन सीमा से लगते हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के अति दुर्गम क्षेत्र में एक और सड़क तैयार की जा रही है। यह सड़क चीन सीमा तक पहुंच बनाने के लिए बनाई जा रही है। ठंगी से चारंग तक 20 km सड़क पर तेजी से काम चल रहा है। Image Source इंडो-चाइना बॉर्डर सड़क ICBR योजना के तहत इस सड़क को 2 लेन बनाया जा रहा हैं। इस सड़क के आखरी गांव चारंग से मात्र 10 किलोमीटर दूरी पर चीन सीमा है। इसके आगे जाने पर आईटीबीपी और सेना की पोस्ट तैनात हैं। Image Source इस सड़क  बनने से बड़ी राहत ग्रामीण लोगों के साथ साथ भारतीय सेना को भी मिलेगी । लोक निर्माण विभाग सड़क को चौड़ा करके पैराफिट का निर्माण किया हैं। और साथ ही ड्रेर्नेज सिस्टम को भी बनाया गया है।150 फीट लंबे बैली ब्रिज जो कि क्यारबू नाले पर बन कर तैयार हो चुका…

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हिमाचल प्रदेश की समुद्र तल से ऊंचाई 350 मीटर से 7,000 मीटर के बीच के लगभग है। हिमाचल प्रदेश को तीन प्रकार की पर्वत श्रृंखलाओं में बांटा गया है। 1. निम्न पर्वत श्रेणी – इस पर्वत श्रेणी को शिवालिक पर्वत के नाम से भी जाना जाता है। शिवालिक शब्द का अर्थ है शिव की जटाएं । इस क्षेत्र की समुद्र तल से ऊंचाई 350 मीटर से 1500 मीटर तक है। प्राचीन काल में शिवालिक पर्वत को मानक पर्वत के नाम से जाना जाता था। इस क्षेत्र में औसत वार्षिक वर्षा 1500 mm से 1800 mm के बीच होती है। हिमाचल प्रदेश के निम्न पर्वत श्रेणी में कांगड़ा उना, हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी, सोलन और सिरमौर के निचले शेत्र आते आते हैं। 2. मध्य पर्वत श्रेणी– इस पर्वत श्रृंखला पर्वत श्रृंखला में सिरमौर जिले के रेणुका, मंडी जिला के करसोग, चंबा की चूराहा और कांगड़ा के ऊपरी भाग जैसे पालमपुर तहसील आदि शामिल…

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Image Source मणिमहेश में 30 वर्ष बाद हजारों शिव भक्तों ने पवित्र झील में डुबकी लगाई है। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर झील में श्रद्धालुओं ने स्नान किया। झील में स्नान करने के लिए पिछले 3 दिनों मे उमड़े शिव भक्तों के जत्थे ने मंगलवार को पवित्र व गर्म पानी में स्नान किया। धार्मिक मान्यता है की रात 12 बजे कृष्ण भगवान के जन्म होने के बाद इस स्नान का महत्व शुरू होता है जो मंगलवार शाम 7 बजे तक जारी रहेगा। दैनिक अखबार पंजाब केसरी के अनुसार 30 वर्षों के बाद इस बार एक स्नान श्रावण महीने में आया यह गर्म स्नान इसलिए खास माना जाता है कि जिस वर्ष होली फाल्गुन महीने में आती है तो उसे सुहागिन माना जाता है तो उस साल जन्माष्टमी का स्नान भी श्रावण महीने में ही आता है। Image Source जिसे शिवजी भगवान का पवित्र महीना माना जाता है। जिस वर्ष होली…

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“A picture is worth a thousand words”. It refers to the notion that a complex ideas and stories can be conveyed with just a single still image or that an image of a subject conveys its meaning or essence more effectively than a description does. So here is the list of “10 Instagram accounts that will give you a reason to visit Himachal time and again“. They are listed in a random order and all of them are very unique and the only thing common between each one of them is their love for photography and mountains🗻. So, lets get to know them one by one: 1) Anunay Sood (@anunaysood) He is from Delhi but Himachali by lineage, which is the reason for his never ending love for Himachal. Professionally, he is a marketing specialist but a photographer by passion. He loves taking landscape pictures of places less or unexplored…

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हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या में यह 5 जनजातियों का भी अपना ही स्थान तथा महत्व है। हिमाचल प्रदेश की पांच मुख्य जनजातियों में किन्नर, लाहौली, गद्दी, पंगवाल और गुज्जर आते हैं। तो आइए विस्तार में जानते हैं हिमाचल प्रदेश की पांच मुख्य जनजातियों के बारे में। 1)किन्नर जनजाति Image Source किन्नर जनजाति किन्नौर जिले से संबंध रखती है। किन्नर मुख्यत कृषक है जो जन्म से मृत्यु तक के संस्कारों को पूरा करने के लिए यह लोग लामा की सहायता लेते हैं। इनमें बहुपति प्रथा प्रचलित है। यह लोग बौद्ध धर्म को मानते हैं। 2) गद्दी जनजाति Image Source Image Source यह जनजाति हिमाचल प्रदेश की सबसे प्रमुख जनजाति है। यह जनजाति मुख्यतः कांगड़ा जिले के बर्फीले क्षेत्रों और चंबा जिले से संबंध रखती है। यह लोग हिंदू धर्म को मानते हैं। गद्दी राजपूत लाहौर से आकर यहां बस गए। इनके मुख्य देवता शिव है। कैलांग में पाए जाने वाले गद्दी जनजाति के देवता दराती देवता है।…

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Kinnaur is one of twelve administrative districts in the Indian state of Himachal Pradesh. With an area of 6,401 km² and population roughly close to 85000, Kinnaur is second least populous district of Himachal Pradesh. Surprisingly, there are nine vital languages are spoken in the district. The district is divided into three administrative areas – Pooh, Kalpa, and Bhaba Nagar and has five tehsils. The administrative headquarters of Kinnaur district is at Reckong Peo. It has two high mountains ranges, namely, Zanskar and Himalayas that enclose valleys of Sutlej, Spiti, Baspa and their tributaries. The old Hindustan–Tibet Road passes through the Kinnaur valley along the bank of river Sutlej and finally enters Tibet at Shipki La pass. The population growth rate over the decade 2001–2011 was 7.61%. Kinnaur has a sex ratio of 818 females for every 1000 males, and a literacy rate of 80.77%. Reckong Peo, is also spelled Rekong Peo and simply known as Peo by the local…

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