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Tag Archives: Hinduism

Image Source मणिमहेश में 30 वर्ष बाद हजारों शिव भक्तों ने पवित्र झील में डुबकी लगाई है। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर झील में श्रद्धालुओं ने स्नान किया। झील में स्नान करने के लिए पिछले 3 दिनों मे उमड़े शिव भक्तों के जत्थे ने मंगलवार को पवित्र व गर्म पानी में स्नान किया। धार्मिक मान्यता है की रात 12 बजे कृष्ण भगवान के जन्म होने के बाद इस स्नान का महत्व शुरू होता है जो मंगलवार शाम 7 बजे तक जारी रहेगा। दैनिक अखबार पंजाब केसरी के अनुसार 30 वर्षों के बाद इस बार एक स्नान श्रावण महीने में आया यह गर्म स्नान इसलिए खास माना जाता है कि जिस वर्ष होली फाल्गुन महीने में आती है तो उसे सुहागिन माना जाता है तो उस साल जन्माष्टमी का स्नान भी श्रावण महीने में ही आता है। Image Source जिसे शिवजी भगवान का पवित्र महीना माना जाता है। जिस वर्ष होली…

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Bhutan is a land-locked country located between India and China. Bhutan is geopolitically in South Asia and is the region’s second least populous nation after the Maldives. Thimpu is its capital and also the largest city, while Phuntsholing is its financial centre. Bhutan had a population of 770,000 people in 2015. There are 1,070 males to every 1,000 females. The literacy rate in Bhutan is 59.5 percent. Bhutanese people primarily consist of the Ngalops and Sharchops, called the Western Bhutanese and Eastern Bhutanese respectively. The Lhotshampa, meaning “southerner Bhutanese”, are a heterogeneous group of mostly Nepalese ancestry. Acc. To records, it has 74.7% Buddhist population, 24.6% Hindu population and remaining percentage are followers of Bon faith, Islam and Christianity. The national language is Bhutanese (Dzongkha), one of 53 languages in the Tibetan language family. The script, here called Chhokey (“Dharma language”), is identical to classical Tibetan. Let’s put light on “15 facts about Bhutan and also the reason why Indian Army is protecting…

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त्रियुगीनारायण मंदिर के बारे में वेदों में उल्लेख भी मिलता है कि यह मंदिर त्रेतायुग से स्थापित है। माता पार्वती और भगवान शिवजी के विवाह के बारे में कई पौराणिक कथाएं हैं। ऐसी ही एक कथा उत्तराखण्ड के रूद्रप्रयाग जिले के त्रियुगीनारायण नाम के मंदिर से जुड़ी हुई है। Image Source इस मंदिर में एक ज्योति हमेशा जलती रहती है। स्थानीय लोगों की मान्यता के मुताबिक इस ज्योति के सामने ही भगवान शिवजी और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मंदिर में जल रही इस ज्योति के बारे में कहा गया है कि यह त्रेतायुग से निरंतर जलती आ रही है। यह ज्योति कभी बंद नहीं होती है। मंदिर के बारे में मान्यता है कि जो लोग यहां शादी करते है उनका दांपत्य जीवन सुखी रहता है। भगवान शिवजी और माता पार्वती का ये मंदिर रुद्रप्रयाग जिले के एक सीमांत गांव में स्थित है। इस मंदिर का नाम त्रियुगीनारायण मंदिर…

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हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। देवभूमि का अर्थ है देवों की भूमि। यह इसलिए कहा जाता है क्योंकि हिमाचल में बहुत ही विश्वविख्यात मंदिर तथा मठ है जिनका अपना ही एक इतिहास है। तो आइए जानते हैं “हिमाचल प्रदेश के 12 जिलों के प्रसिद्ध मंदिर तथा मठ” के बारे में कुल्लू 1)रघुनाथ मंदिर   यह सुल्तानपुर, कुल्लू जिले में स्थित है यह मंदिर मनु देवता को समर्पित है। Image Source 2) जामलू मंदिर यह मंदिर जामलू देवता को समर्पित है। मंदिर कुल्लू जिले के मलाना गांव में स्थित है ।जामलू देवता जमदिग्न ऋषि को कहा जाता है। 3) बिजली महादेव मंदिर यह मंदिर कुल्लू से 14 किलोमीटर दूर ब्यास नदी के तट के किनारे स्थित है यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। Image Source 4) हिडिंबा देवी मंदिर इस मंदिर का निर्माण 1553ई. मैं राजा बहादुर सिंह ने करवाया था। जय मंदिर भीम की पत्नी…

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 Himachal Pradesh is called Devbhoomi which means “Land of God“. There are numerous temples and sacred places in this beautiful little heaven. Each village has their own deities whom they worship and they are considered in every crucial happenings. We will take you on a journey where we will talk about the popular and historically important religious places of Himachal Pradesh one by one. This time we will be talking about “PaudiWala: the second ladder to Heaven built by Ravana“. Mythological Significance: It is believed that once Lord Shiva bestowed Ravana the wish to become immortal due to his immense austerity on just one condition if he could make 5 ladders to Heaven (स्वर्ग की सीढ़ी) in a single day. So he started from the ‘Har Ki Pauri‘ at Haridwar which became the first ladder.  Then he made this second ladder which is now known as ‘PaudiWala‘. The 3rd ladder was at  ‘Chureshwar Mahadev‘ or…

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