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Tag Archives: chamba

हिमनद या फिर हिमानी, बस्ते जहां भोले बर्फानी, नदियां करती कल कल, यही है मेरा हिमाचल, भोले यहाँ के लोग, मीठे उनके बोल, जहां खुशियाँ हैं हरपाल, यही है मेरा हिमाचल, पहाड़ों से वीर यहाँ, इसके जैसा स्वर्ग कहाँ, देव बसते हैं जहां आकर, यही है मेरा हिमाचल, सेब-नाशपती के बाग, या सारसो का साग, हरकुछ मेल यहाँ पर, यही है मेरा हिमाचल, धाम यहाँ की पहचान, और सिड्डु का भी है नाम, दिल मोहते फूल और फल, यही है मेरा हिमाचल, कांगड़ा मंडी या शिमला किन्नौर , सोलन हमीरपुर देश के सिरमौर, तत्पर है सूरज नया उगने को कल, यही है मेरा हिमाचल, ऊना बिलासपुर की अब लोर, चले नई किरण की ओर, कुल्लू चंबा स्पीति लाहुल, यही है मेरा हिमाचल, यही है मेरा हिमाचल!!!! यह कविता ऋषभ शर्मा द्वारा लिखी गई है। साथ ही इस कविता में उपस्थित चित्र भी उन्होंने ही उपलब्ध कराए हैं। हमें उम्मीद है कि आपको यह कविता पसंद आई होगी।  

हिमाचल प्रदेश की समुद्र तल से ऊंचाई 350 मीटर से 7,000 मीटर के बीच के लगभग है। हिमाचल प्रदेश को तीन प्रकार की पर्वत श्रृंखलाओं में बांटा गया है। 1. निम्न पर्वत श्रेणी – इस पर्वत श्रेणी को शिवालिक पर्वत के नाम से भी जाना जाता है। शिवालिक शब्द का अर्थ है शिव की जटाएं । इस क्षेत्र की समुद्र तल से ऊंचाई 350 मीटर से 1500 मीटर तक है। प्राचीन काल में शिवालिक पर्वत को मानक पर्वत के नाम से जाना जाता था। इस क्षेत्र में औसत वार्षिक वर्षा 1500 mm से 1800 mm के बीच होती है। हिमाचल प्रदेश के निम्न पर्वत श्रेणी में कांगड़ा उना, हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी, सोलन और सिरमौर के निचले शेत्र आते आते हैं। 2. मध्य पर्वत श्रेणी– इस पर्वत श्रृंखला पर्वत श्रृंखला में सिरमौर जिले के रेणुका, मंडी जिला के करसोग, चंबा की चूराहा और कांगड़ा के ऊपरी भाग जैसे पालमपुर तहसील आदि शामिल…

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हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या 68 लाख से ज्यादा है। हिंदी भाषा को आधिकारिक भाषा का सम्मान प्राप्त है तथा अंग्रेजी भाषा को अतिरिक्त आधिकारिक भाषा के रूप में जाना जाता है। अंग्रेज भाषाविद्वान G.A Grierson ने हिमाचली भाषाओं का पश्चिमी पहाड़ी भाषाओं के रूप में सर्वेक्षण किया पहाड़ी भाषा का अपभ्रश शौरसैनी है। पहाड़ी भाषा की लिपि टांकरी है। हिमाचल में 88.77% लोग( हिंदी पहाड़ी) बोलते हैं और 5.83% लोग पंजाबी बोलते हैं। पहाड़ी भाषा बोलने वालों की संख्या कम होती जा रही है तथा हम इस पर चर्चा करेंगे पर आइए पहले जानते है कि हर जिले में कौन सी तरह की पहाड़ी बोली जाती है। चंबा  चंबा जिले में चंम्बयाली बोली जाती है। चंबा जिले में स्थानीय बोलियां भी बोली जाती हैं जिनमें भटियाली , चुराही, पंगवाली और भरमौरी  है। बिलासपुर बिलासपुर जिले में मुख्य भाषा कहलूरी बोली जाती है। कहलूरी को बिलासपुरी भाषा भी कहा जाता है। यह भी पढ़े। जानिए हिमाचल प्रदेश की पर्वत…

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जोत पहाड़ो का राजा:- अगर शिमला पहाड़ो की रानी है तो जोत पहाड़ो का राजा है। “जोत” पहाड़ी बोली का शब्द है हिंदी में इसे दर्रा और अंग्रेजी में पास कहा जाता है। हिमाचल में बहुत से दर्रे हैं परंतु जिला चम्बा में भट्टियात और चम्बा को मिलाने वाला जोत बहुत प्रसिद्ध है। हिमाचल को कुदरत ने बेपनाह खूबसूरती बख्शी है। और पहाड़ो की ऊंची चोटियों पर देवदार के वृक्षों में पड़े वर्फ़ के फाहों में जब आप मस्ती में झूम जाओ तो समझो आप हिमाचल की खूबसूरत धरती का आनंद उठा रहे हो। कुछ ऐसा ही नजारा है जोत का भी। जोत का नाम:- वैसे तो जोत अब इसी नाम से मशहूर हो चुका है परंतु इसके असली नाम “वसोदन” जोत है। परन्तु बहुत कम लोग इस नाम से परिचित हैं। स्थान:- जोत समुद्र तल से 2300 मीटर की ऊंचाई पर एक सुंदर पर्यटन स्थल है। यह स्थान चुवाड़ी से…

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हिमाचल प्रदेश को देवभूमि भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां पर बहुत सारे देवी देवताओं के मंदिर है। जिनका अपना एक पुराना इतिहास है। यही कारण है कि हिमाचल प्रदेश अपनी वास्तु कला के लिए भी प्रसिद्ध है। वास्तु कला में हिमाचल प्रदेश को मंदिर की छत के आकार के आधार पर स्तूपाकार, शिखर, गुंबदाकार, पगौड़ा , बंदछत शैली और समतल शैली में बांटा गया है। 1) स्तूपाकार शैली Image Source इस शैली में बने अधिकतर मंदिर शिमला जिले में स्थित है। शिमला के हाटकोटी के राजेश्वरी मंदिर और शिव मंदिर को इस शैली मे बनाया गया है। जुब्बल क्षेत्र में अधिकतर मंदिर की शैली के बने हैं। ‌2) शिखर शैली   इस शैली से बने मंदिरों की छत का उपरी हिस्सा पर्वत की तरह चोटीनुमा होता है ।कांगड़ा जिले के बहुत से मंदिर इस शैली में बने हैं। कांगड़ा का मशहूर मसरूर रॉक कट मंदिर भी इसी शैली में बना है।…

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हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या में यह 5 जनजातियों का भी अपना ही स्थान तथा महत्व है। हिमाचल प्रदेश की पांच मुख्य जनजातियों में किन्नर, लाहौली, गद्दी, पंगवाल और गुज्जर आते हैं। तो आइए विस्तार में जानते हैं हिमाचल प्रदेश की पांच मुख्य जनजातियों के बारे में। 1)किन्नर जनजाति Image Source किन्नर जनजाति किन्नौर जिले से संबंध रखती है। किन्नर मुख्यत कृषक है जो जन्म से मृत्यु तक के संस्कारों को पूरा करने के लिए यह लोग लामा की सहायता लेते हैं। इनमें बहुपति प्रथा प्रचलित है। यह लोग बौद्ध धर्म को मानते हैं। 2) गद्दी जनजाति Image Source Image Source यह जनजाति हिमाचल प्रदेश की सबसे प्रमुख जनजाति है। यह जनजाति मुख्यतः कांगड़ा जिले के बर्फीले क्षेत्रों और चंबा जिले से संबंध रखती है। यह लोग हिंदू धर्म को मानते हैं। गद्दी राजपूत लाहौर से आकर यहां बस गए। इनके मुख्य देवता शिव है। कैलांग में पाए जाने वाले गद्दी जनजाति के देवता दराती देवता है।…

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Image source जवाहरलाल नेहरु राजकीय मेडिकल कॉलेज चंबा में एमबीबीएस की कक्षाएं इस सत्र में शुरू हो जाएंगे | मेडिकल कॉलेज भवन का निर्माण के लिए भूमि चिन्हित कर ली गई है| Image Source मुख्यमंत्री वीरभद्र जी ने पांगी चंबा मे एक जनसभा संबोधित करते हुए यह बात कही|मुख्यमंत्री ने यहां के लोगों को सर्दियों के समय में बिजली की किल्लत से छुटकारा दिलाने के लिए सौर ऊर्जा प्लांट लगाने की बात कर विचार करने का आश्वासन दिया है और इस पर सर्वेक्षण करने के बाद विचार किया जाएगा| Image source

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