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Category Archives: Pilgrimage

Hankering for a vacation? Vacation means to soothe your soul. But don’t let your relaxation destroy the beauty of himalayas by littering garbage. One thing is to be taken care of by which you can save the environment over there , i.e. to park your vehicle in your hotel and explore the city barefoot. Come and let’s start exploring the beautiful Manali together! •Old Manali Instagram: pahadi_pilgrim The most cleanest place of Manali because it is still comparitively untouched by tourists. There is a “Manu temple” on the peak of old Manali and the drooling shops over there have such classy apparels , danglers and ornaments. There are many great cafes to chill and enjoy great food with live music and awesome crowd. •Solang Valley image Source :- @sinhasougata A place 13 km from Manali which is famous for various adventures activities such as paragliding , bungee jumping,  ball ride…

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The gurus treated by everyone with deference – Lamas or the modern day “Monks” are often considered as the people practicing esoteric traditions, but in reality they are the enlightening source to understand one’s conduct in conformity. They promulgate the level of spiritual attainment with reference to the teachings of Buddha. The custom started by a Shunyi prince who declared the first spiritual leader for lamas from Ming Dynasty inherited by 13 more and the present day leader is Tenzin Gyatso (1940) or Dalai Lama. After the death of the predecessor, a Shrine dedicated to the prophets is consulted for the whereabouts of the successor. The heir is then trained under a strict regimen by his de facto parents. The training includes meditation and chanting mostly. Apart from that there are 227 strict percepts of conduct they need to follow and a quotidian of walking barefoot around to gather the…

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चूड़धार पर्वत हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित है। चूड़धार पर्वत समुद्र तल से 11965 फीट(3647 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है । यह पर्वत सिरमौर जिले और बाहय हिमालय(Outer Himalayas) की सबसे ऊंची चोटी है। सिरमौर ,चौपाल ,शिमला, सोलन उत्तराखंड के कुछ सीमावर्ती इलाकों के लोग इस पर्वत में धार्मिक आस्था रखते हैं। चूड़धार को श्री शिरगुल महाराज का स्थान माना जाता है। यहां शिरगुल महाराज का मंदिर भी स्थित है। शिरगुल महाराज सिरमौर व चौपाल के देवता है।  चूड़धार कैसे पहुंचा जाए ? चूड़धार पर्वत तक पहुंचने के दो रास्ते हैं। मुख्य रास्ता नौराधार से होकर जाता है तथा यहां से चूड़धार 14 किलोमीटर है। दूसरा रास्ता सराहन चौपाल से होकर गुजरता है। यहां से चूड़धार 6 किलोमीटर है। मंदिर से जुड़ी मान्यता इस मंदिर के बनने के पीछे एक पुराणिक कहानी जुड़ी है‌। मान्यता है कि एक बार चूरू नाम का शिव भक्त, अपने पुत्र के…

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Image Source मणिमहेश में 30 वर्ष बाद हजारों शिव भक्तों ने पवित्र झील में डुबकी लगाई है। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर झील में श्रद्धालुओं ने स्नान किया। झील में स्नान करने के लिए पिछले 3 दिनों मे उमड़े शिव भक्तों के जत्थे ने मंगलवार को पवित्र व गर्म पानी में स्नान किया। धार्मिक मान्यता है की रात 12 बजे कृष्ण भगवान के जन्म होने के बाद इस स्नान का महत्व शुरू होता है जो मंगलवार शाम 7 बजे तक जारी रहेगा। दैनिक अखबार पंजाब केसरी के अनुसार 30 वर्षों के बाद इस बार एक स्नान श्रावण महीने में आया यह गर्म स्नान इसलिए खास माना जाता है कि जिस वर्ष होली फाल्गुन महीने में आती है तो उसे सुहागिन माना जाता है तो उस साल जन्माष्टमी का स्नान भी श्रावण महीने में ही आता है। Image Source जिसे शिवजी भगवान का पवित्र महीना माना जाता है। जिस वर्ष होली…

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त्रियुगीनारायण मंदिर के बारे में वेदों में उल्लेख भी मिलता है कि यह मंदिर त्रेतायुग से स्थापित है। माता पार्वती और भगवान शिवजी के विवाह के बारे में कई पौराणिक कथाएं हैं। ऐसी ही एक कथा उत्तराखण्ड के रूद्रप्रयाग जिले के त्रियुगीनारायण नाम के मंदिर से जुड़ी हुई है। Image Source इस मंदिर में एक ज्योति हमेशा जलती रहती है। स्थानीय लोगों की मान्यता के मुताबिक इस ज्योति के सामने ही भगवान शिवजी और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मंदिर में जल रही इस ज्योति के बारे में कहा गया है कि यह त्रेतायुग से निरंतर जलती आ रही है। यह ज्योति कभी बंद नहीं होती है। मंदिर के बारे में मान्यता है कि जो लोग यहां शादी करते है उनका दांपत्य जीवन सुखी रहता है। भगवान शिवजी और माता पार्वती का ये मंदिर रुद्रप्रयाग जिले के एक सीमांत गांव में स्थित है। इस मंदिर का नाम त्रियुगीनारायण मंदिर…

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हिमाचल प्रदेश को देवभूमि भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां पर बहुत सारे देवी देवताओं के मंदिर है। जिनका अपना एक पुराना इतिहास है। यही कारण है कि हिमाचल प्रदेश अपनी वास्तु कला के लिए भी प्रसिद्ध है। वास्तु कला में हिमाचल प्रदेश को मंदिर की छत के आकार के आधार पर स्तूपाकार, शिखर, गुंबदाकार, पगौड़ा , बंदछत शैली और समतल शैली में बांटा गया है। 1) स्तूपाकार शैली Image Source इस शैली में बने अधिकतर मंदिर शिमला जिले में स्थित है। शिमला के हाटकोटी के राजेश्वरी मंदिर और शिव मंदिर को इस शैली मे बनाया गया है। जुब्बल क्षेत्र में अधिकतर मंदिर की शैली के बने हैं। ‌2) शिखर शैली   इस शैली से बने मंदिरों की छत का उपरी हिस्सा पर्वत की तरह चोटीनुमा होता है ।कांगड़ा जिले के बहुत से मंदिर इस शैली में बने हैं। कांगड़ा का मशहूर मसरूर रॉक कट मंदिर भी इसी शैली में बना है।…

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हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। देवभूमि का अर्थ है देवों की भूमि। यह इसलिए कहा जाता है क्योंकि हिमाचल में बहुत ही विश्वविख्यात मंदिर तथा मठ है जिनका अपना ही एक इतिहास है। तो आइए जानते हैं “हिमाचल प्रदेश के 12 जिलों के प्रसिद्ध मंदिर तथा मठ” के बारे में कुल्लू 1)रघुनाथ मंदिर   यह सुल्तानपुर, कुल्लू जिले में स्थित है यह मंदिर मनु देवता को समर्पित है। Image Source 2) जामलू मंदिर यह मंदिर जामलू देवता को समर्पित है। मंदिर कुल्लू जिले के मलाना गांव में स्थित है ।जामलू देवता जमदिग्न ऋषि को कहा जाता है। 3) बिजली महादेव मंदिर यह मंदिर कुल्लू से 14 किलोमीटर दूर ब्यास नदी के तट के किनारे स्थित है यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। Image Source 4) हिडिंबा देवी मंदिर इस मंदिर का निर्माण 1553ई. मैं राजा बहादुर सिंह ने करवाया था। जय मंदिर भीम की पत्नी…

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This is Himalayas which literally the abode of snow. It is the last frontier king of all mountains. Here species have thrived and gone extinct, civilizations came and then destroyed, but mountains they have seen it all. The idea of travel should not just involve moving from one place to another. So let’s talk about “5 Places you must not miss on a trip to Kullu-Manali“. 1.Bijli mahadev temple Bijli mahadev temple is one of the oldest temple of Kullu valley dedicated to lord Shiva. Situated at a height of more than 7000ft. above mean sea level. Temple got its name because every year a lightning bolt struck the wooden pole outside temple and then completely shattering shivling in the temple. The shivling is rebuilt by using ghee, butter and flour situated at a distance of 15km from Kullu town. The place is easily accessible by car and bus. Then it’s a…

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 Himachal Pradesh is called Devbhoomi which means “Land of God“. There are numerous temples and sacred places in this beautiful little heaven. Each village has their own deities whom they worship and they are considered in every crucial happenings. We will take you on a journey where we will talk about the popular and historically important religious places of Himachal Pradesh one by one. This time we will be talking about “PaudiWala: the second ladder to Heaven built by Ravana“. Mythological Significance: It is believed that once Lord Shiva bestowed Ravana the wish to become immortal due to his immense austerity on just one condition if he could make 5 ladders to Heaven (स्वर्ग की सीढ़ी) in a single day. So he started from the ‘Har Ki Pauri‘ at Haridwar which became the first ladder.  Then he made this second ladder which is now known as ‘PaudiWala‘. The 3rd ladder was at  ‘Chureshwar Mahadev‘ or…

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