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Category Archives: Nature

Image Source चीन सीमा से लगते हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के अति दुर्गम क्षेत्र में एक और सड़क तैयार की जा रही है। यह सड़क चीन सीमा तक पहुंच बनाने के लिए बनाई जा रही है। ठंगी से चारंग तक 20 km सड़क पर तेजी से काम चल रहा है। Image Source इंडो-चाइना बॉर्डर सड़क ICBR योजना के तहत इस सड़क को 2 लेन बनाया जा रहा हैं। इस सड़क के आखरी गांव चारंग से मात्र 10 किलोमीटर दूरी पर चीन सीमा है। इसके आगे जाने पर आईटीबीपी और सेना की पोस्ट तैनात हैं। Image Source इस सड़क  बनने से बड़ी राहत ग्रामीण लोगों के साथ साथ भारतीय सेना को भी मिलेगी । लोक निर्माण विभाग सड़क को चौड़ा करके पैराफिट का निर्माण किया हैं। और साथ ही ड्रेर्नेज सिस्टम को भी बनाया गया है।150 फीट लंबे बैली ब्रिज जो कि क्यारबू नाले पर बन कर तैयार हो चुका…

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Image Source Tumuskura शिमला सर्दियों का सीजन शुरू होते ही बर्फबारी को देखने शिमला आने वाले पर्यटकों का तांता लग जाता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए  रेलवे न पर्यटकों को खास तोफा दिया है। उत्तर रेलवेे अब पर्यटकों के लिए 2 नई ट्रेनें चलाएगा। इस खबर की पुष्टि उत्तर रेलवे के सोलन रेलवे स्टेशन मास्टर कमलेश चंद्र ने की है। स्टेशन मास्टर कमलेश चंद्र ने बताया कि यह 2 विशेष ट्रेन दिसंबर और जनवरी माह के बीच चलेगी। उन्होंने कहा कि करीब 15 दिसंबर से दोनों ट्रेनें सुचारू रूप से शुरू हो जाएंगी। Image Source हॉलीडे स्पेशल नाम से चलने वाली इन ट्रेनों क चलनेे के बाद शिमला -कालका रेलवे ट्रेक पर चलने वाली रेल गाड़ियों की संख्या 6 बढ़कर 8 हो जाएगी। जैसे ही  रेलगाड़ियों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी, वैसे वैसे इनके आवागमन के समय में भी बदलाव किए जाएंगे। Image Source गौरतलब है कि इस…

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रोहतांग दर्रे में बुधवार को इस सीजन की पहली बर्फबारी हुई, इस बर्फबारी के साथ ही अगले साल तक गाड़ियों के आने जाने के लिए रोहतांग दर्रा बंद कर दिया गया। पैदल यात्री और गुजरने वाले स्थानीय लोगों और पर्यटकों की सुरक्षा के मध्यनजर रखते हुए यहां दो बचाव चौकियां भी बना दी गई हैं। इन बचाव चौकियों में पुलिस और अन्य दस्तों के 9-9 कर्मचारी भी तैनात रहेंगे। लगाता समाचार पाने के लिए हमारे facebook group onehimachal से जुड़िए । Image Source @sinhasougata यह भी पढ़े। खुशखबरी: प्रदेश की पहली इलेक्ट्रिक बस ने पूरा किया अपना पहला कमर्शियल रन। जानिए किराया रूट  हिमाचल प्रदेश की चोटियों पर हुई ताजा बर्फबारी का असर निचले मैदानी इलाकों में बुधवार से ही दिखना शुरू हो गया। Image Source:- @no_watermarks पहाड़ों से आने वाली सर्द हवाओं से कोहरा के बादल कुछ कम हुए है। मौसम विभाग का कहना है कि सर्द हवाओं की वजह से…

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चूड़धार पर्वत हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित है। चूड़धार पर्वत समुद्र तल से 11965 फीट(3647 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है । यह पर्वत सिरमौर जिले और बाहय हिमालय(Outer Himalayas) की सबसे ऊंची चोटी है। सिरमौर ,चौपाल ,शिमला, सोलन उत्तराखंड के कुछ सीमावर्ती इलाकों के लोग इस पर्वत में धार्मिक आस्था रखते हैं। चूड़धार को श्री शिरगुल महाराज का स्थान माना जाता है। यहां शिरगुल महाराज का मंदिर भी स्थित है। शिरगुल महाराज सिरमौर व चौपाल के देवता है।  चूड़धार कैसे पहुंचा जाए ? चूड़धार पर्वत तक पहुंचने के दो रास्ते हैं। मुख्य रास्ता नौराधार से होकर जाता है तथा यहां से चूड़धार 14 किलोमीटर है। दूसरा रास्ता सराहन चौपाल से होकर गुजरता है। यहां से चूड़धार 6 किलोमीटर है। मंदिर से जुड़ी मान्यता इस मंदिर के बनने के पीछे एक पुराणिक कहानी जुड़ी है‌। मान्यता है कि एक बार चूरू नाम का शिव भक्त, अपने पुत्र के…

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हिमाचल प्रदेश की समुद्र तल से ऊंचाई 350 मीटर से 7,000 मीटर के बीच के लगभग है। हिमाचल प्रदेश को तीन प्रकार की पर्वत श्रृंखलाओं में बांटा गया है। 1. निम्न पर्वत श्रेणी – इस पर्वत श्रेणी को शिवालिक पर्वत के नाम से भी जाना जाता है। शिवालिक शब्द का अर्थ है शिव की जटाएं । इस क्षेत्र की समुद्र तल से ऊंचाई 350 मीटर से 1500 मीटर तक है। प्राचीन काल में शिवालिक पर्वत को मानक पर्वत के नाम से जाना जाता था। इस क्षेत्र में औसत वार्षिक वर्षा 1500 mm से 1800 mm के बीच होती है। हिमाचल प्रदेश के निम्न पर्वत श्रेणी में कांगड़ा उना, हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी, सोलन और सिरमौर के निचले शेत्र आते आते हैं। 2. मध्य पर्वत श्रेणी– इस पर्वत श्रृंखला पर्वत श्रृंखला में सिरमौर जिले के रेणुका, मंडी जिला के करसोग, चंबा की चूराहा और कांगड़ा के ऊपरी भाग जैसे पालमपुर तहसील आदि शामिल…

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केंद्र की मोदी सरकार ने हिमाचल के उद्योगों के we लिए टैक्स रियायत 10 साल के लिए बढ़ाई है। इसका फायदा प्रदेश के करीब हजार उद्योगों को मिलेगा। जिन उद्योगों को केंद्रीय आबकारी शुल्क में 31 मार्च 2017 तक छूट दी जा रही थी, जीएसटी लागू होने के बाद उन्हें सीजीएसटी और आईजीएसटी में छूट दी गई है। दैनिक समाचार पत्र अमर उजाला की खबर के अनुसार यह छूट जुलाई 2017 से मार्च 2027 तक मिलेगी। जीएसटी लागू होने के बाद जिन उद्योगों से सीजीएसटी और आईजीएसटी लिया गया है, उन्हें रिफंड किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने जम्मू एवं कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और राज्य में स्थित उपयुक्त औद्योगिक इकाइयों के लिए  गुड्स और सर्विस कर व्यवस्था के तहत बजट सहायता प्रदान कर को मंजूरी दी है। इसी योजना में 10 साल के लिए कर छूट की व्यवस्था का प्रावधान किया…

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जोत पहाड़ो का राजा:- अगर शिमला पहाड़ो की रानी है तो जोत पहाड़ो का राजा है। “जोत” पहाड़ी बोली का शब्द है हिंदी में इसे दर्रा और अंग्रेजी में पास कहा जाता है। हिमाचल में बहुत से दर्रे हैं परंतु जिला चम्बा में भट्टियात और चम्बा को मिलाने वाला जोत बहुत प्रसिद्ध है। हिमाचल को कुदरत ने बेपनाह खूबसूरती बख्शी है। और पहाड़ो की ऊंची चोटियों पर देवदार के वृक्षों में पड़े वर्फ़ के फाहों में जब आप मस्ती में झूम जाओ तो समझो आप हिमाचल की खूबसूरत धरती का आनंद उठा रहे हो। कुछ ऐसा ही नजारा है जोत का भी। जोत का नाम:- वैसे तो जोत अब इसी नाम से मशहूर हो चुका है परंतु इसके असली नाम “वसोदन” जोत है। परन्तु बहुत कम लोग इस नाम से परिचित हैं। स्थान:- जोत समुद्र तल से 2300 मीटर की ऊंचाई पर एक सुंदर पर्यटन स्थल है। यह स्थान चुवाड़ी से…

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Image Source 1) Himansh is the Glaciological Research Centre which is situated at an altitude of nearly 13,500 feet or 4000 mtr in the Spiti Valley of Himachal Pradesh and it is consider to be the highest point from where an Indian Glacier Research Facility is functioning. 2) The Glacial Research Lab is established by the National Centre for Antarctic and Ocean Research (NCAOR). 3) The research centre is equipped with Automatic Weather Stations, Ground Penetrating Radars, Geodetic GPS systems and other technological facilities to study glaciers and their discharge. Image Source 4) The NCAOR will be serving as the base for Terrestrial Laser Scanners and Unmanned Aerial Vehicles to Digitise Glacier Movements and Snow Cover Variations. 5) The Digital Satellite Phone Terminal System established in the Himansh is the only communication link to the outer world. As Himansh is situated at very tough terrain with rough weather marked by…

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Swach Bharat” , “Swach Himalaya” , “Harit Himalaya” !! The above line suggests “Clean & Green Himalayas” which is a good step towards “Swach Bharat” which is a dream of every Indian out there and is waiting for the day when our India will be dirt free and also a least polluted country in the world. The people of Lahaul- Spiti has the same feeling towards environment and that’s why they are starting a cleanliness drive from a place called ‘Koksar’ to District Headquarter ‘Keylong’ . We are happy and honored to be a part of such a noble initiative. Their Swach Campaign also  includes plantation of trees which is another wonderful step towards the Green Revolution and ‘Harit’ Himalaya which means ‘Green Himalaya’. As we all know in today’s scenario the hills are being exploited with wastes like plastics all over the places like in forests and in water…

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त्रियुगीनारायण मंदिर के बारे में वेदों में उल्लेख भी मिलता है कि यह मंदिर त्रेतायुग से स्थापित है। माता पार्वती और भगवान शिवजी के विवाह के बारे में कई पौराणिक कथाएं हैं। ऐसी ही एक कथा उत्तराखण्ड के रूद्रप्रयाग जिले के त्रियुगीनारायण नाम के मंदिर से जुड़ी हुई है। Image Source इस मंदिर में एक ज्योति हमेशा जलती रहती है। स्थानीय लोगों की मान्यता के मुताबिक इस ज्योति के सामने ही भगवान शिवजी और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मंदिर में जल रही इस ज्योति के बारे में कहा गया है कि यह त्रेतायुग से निरंतर जलती आ रही है। यह ज्योति कभी बंद नहीं होती है। मंदिर के बारे में मान्यता है कि जो लोग यहां शादी करते है उनका दांपत्य जीवन सुखी रहता है। भगवान शिवजी और माता पार्वती का ये मंदिर रुद्रप्रयाग जिले के एक सीमांत गांव में स्थित है। इस मंदिर का नाम त्रियुगीनारायण मंदिर…

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