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Category Archives: Mythology

चूड़धार पर्वत हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित है। चूड़धार पर्वत समुद्र तल से 11965 फीट(3647 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है । यह पर्वत सिरमौर जिले और बाहय हिमालय(Outer Himalayas) की सबसे ऊंची चोटी है। सिरमौर ,चौपाल ,शिमला, सोलन उत्तराखंड के कुछ सीमावर्ती इलाकों के लोग इस पर्वत में धार्मिक आस्था रखते हैं। चूड़धार को श्री शिरगुल महाराज का स्थान माना जाता है। यहां शिरगुल महाराज का मंदिर भी स्थित है। शिरगुल महाराज सिरमौर व चौपाल के देवता है।  चूड़धार कैसे पहुंचा जाए ? चूड़धार पर्वत तक पहुंचने के दो रास्ते हैं। मुख्य रास्ता नौराधार से होकर जाता है तथा यहां से चूड़धार 14 किलोमीटर है। दूसरा रास्ता सराहन चौपाल से होकर गुजरता है। यहां से चूड़धार 6 किलोमीटर है। मंदिर से जुड़ी मान्यता इस मंदिर के बनने के पीछे एक पुराणिक कहानी जुड़ी है‌। मान्यता है कि एक बार चूरू नाम का शिव भक्त, अपने पुत्र के…

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कांगड़ा जिले का मुख्यालय धर्मशाला है। जिसकी समुद्र तल से ऊंचाई 1597 मीटर है। इसका क्षेत्रफल 5739 वर्ग किलोमीटर है। जनसंख्या के हिसाब से कांगड़ा हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा जिला है| कांगड़ा जिले के कुछ आंकड़े: जनसंख्या 15,07,223 लिंग अनुपात 1013 जनसंख्या घनत्व 263 साक्षरता दर 86% कांगड़ा का इतिहास कांगड़ा को पुराने समय मे त्रिगर्त नाम से जाना जाता था। यह हिमाचल की सबसे पुरानी रियासत थी जिसकी राजधानी नगरकोट थी। त्रिगर्त रियासत की स्थापना सुशर्माचंद्र ने की थी। सुशर्माचंद्र ने ही नगरकोट किले का निर्माण करवाया था। त्रिगर्त रियासत पर काफी आक्रमण भी हुए जो इस प्रकार है: 1009ई. में महमूद गजनबी ने आक्रमण किया। 1337ई. में मोहम्मद बिन तुगलक ने आक्रमण किया। 1365ई. में फिरोजशाह तुगलक ने आक्रमण किया।1540ई. मे शेरशाह सूरी ने आक्रमण किया और 1620ई. मे जहांगीर ने कांगड़ा के किले पर आक्रमण किया। 1809 में संसारचंद और महाराजा रणजीत सिंह के बीच ज्वालामुखी संधि…

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Image Source मणिमहेश में 30 वर्ष बाद हजारों शिव भक्तों ने पवित्र झील में डुबकी लगाई है। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर झील में श्रद्धालुओं ने स्नान किया। झील में स्नान करने के लिए पिछले 3 दिनों मे उमड़े शिव भक्तों के जत्थे ने मंगलवार को पवित्र व गर्म पानी में स्नान किया। धार्मिक मान्यता है की रात 12 बजे कृष्ण भगवान के जन्म होने के बाद इस स्नान का महत्व शुरू होता है जो मंगलवार शाम 7 बजे तक जारी रहेगा। दैनिक अखबार पंजाब केसरी के अनुसार 30 वर्षों के बाद इस बार एक स्नान श्रावण महीने में आया यह गर्म स्नान इसलिए खास माना जाता है कि जिस वर्ष होली फाल्गुन महीने में आती है तो उसे सुहागिन माना जाता है तो उस साल जन्माष्टमी का स्नान भी श्रावण महीने में ही आता है। Image Source जिसे शिवजी भगवान का पवित्र महीना माना जाता है। जिस वर्ष होली…

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रक्षाबंधन या राखी एक हिंदू त्योहार है जो भारतीय उपमहाद्वीप के कई हिस्सों में मनाया जाता है, विशेषकर भारत और नेपाल में। रक्षाबंधन का अर्थ है “सुरक्षा का बंधन“। यह हिंदू कैलेंडर में श्रावण मास के पूर्णिमा दिवस पर मनाया जाता है, जो आमतौर पर ग्रेगोरी कैलेंडर के अगस्त माह में पड़ता है। यह त्योहार भाइयों और बहनों के बीच प्रेम और कर्तव्य को मनाता है। रक्षाबंधन पर, एक बहन अपनी समृद्धि और खुशी की प्रार्थना के साथ अपने भाई की कलाई पर एक राखी (पवित्र धागे) को बांधती है। यह बहन के प्यार का प्रतीक है तथा भाई उसे बदलें में एक उपहार और उसे सुरक्षित रखने का वादा देता है। चलिए अब बात करते हैं रक्षाबंधन से जुड़ी 6 ऐतिहासिक तथा पौराणिक कथाएं जो शायद आपको मालूम ना हो 1. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, इंद्राणी जो भगवान इंद्र की पत्नी थी ने जब इंद्र राक्षसों से लड़ने जा रहे…

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त्रियुगीनारायण मंदिर के बारे में वेदों में उल्लेख भी मिलता है कि यह मंदिर त्रेतायुग से स्थापित है। माता पार्वती और भगवान शिवजी के विवाह के बारे में कई पौराणिक कथाएं हैं। ऐसी ही एक कथा उत्तराखण्ड के रूद्रप्रयाग जिले के त्रियुगीनारायण नाम के मंदिर से जुड़ी हुई है। Image Source इस मंदिर में एक ज्योति हमेशा जलती रहती है। स्थानीय लोगों की मान्यता के मुताबिक इस ज्योति के सामने ही भगवान शिवजी और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मंदिर में जल रही इस ज्योति के बारे में कहा गया है कि यह त्रेतायुग से निरंतर जलती आ रही है। यह ज्योति कभी बंद नहीं होती है। मंदिर के बारे में मान्यता है कि जो लोग यहां शादी करते है उनका दांपत्य जीवन सुखी रहता है। भगवान शिवजी और माता पार्वती का ये मंदिर रुद्रप्रयाग जिले के एक सीमांत गांव में स्थित है। इस मंदिर का नाम त्रियुगीनारायण मंदिर…

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हिमाचल प्रदेश को देवभूमि भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां पर बहुत सारे देवी देवताओं के मंदिर है। जिनका अपना एक पुराना इतिहास है। यही कारण है कि हिमाचल प्रदेश अपनी वास्तु कला के लिए भी प्रसिद्ध है। वास्तु कला में हिमाचल प्रदेश को मंदिर की छत के आकार के आधार पर स्तूपाकार, शिखर, गुंबदाकार, पगौड़ा , बंदछत शैली और समतल शैली में बांटा गया है। 1) स्तूपाकार शैली Image Source इस शैली में बने अधिकतर मंदिर शिमला जिले में स्थित है। शिमला के हाटकोटी के राजेश्वरी मंदिर और शिव मंदिर को इस शैली मे बनाया गया है। जुब्बल क्षेत्र में अधिकतर मंदिर की शैली के बने हैं। ‌2) शिखर शैली   इस शैली से बने मंदिरों की छत का उपरी हिस्सा पर्वत की तरह चोटीनुमा होता है ।कांगड़ा जिले के बहुत से मंदिर इस शैली में बने हैं। कांगड़ा का मशहूर मसरूर रॉक कट मंदिर भी इसी शैली में बना है।…

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This is Himalayas which literally the abode of snow. It is the last frontier king of all mountains. Here species have thrived and gone extinct, civilizations came and then destroyed, but mountains they have seen it all. The idea of travel should not just involve moving from one place to another. So let’s talk about “5 Places you must not miss on a trip to Kullu-Manali“. 1.Bijli mahadev temple Bijli mahadev temple is one of the oldest temple of Kullu valley dedicated to lord Shiva. Situated at a height of more than 7000ft. above mean sea level. Temple got its name because every year a lightning bolt struck the wooden pole outside temple and then completely shattering shivling in the temple. The shivling is rebuilt by using ghee, butter and flour situated at a distance of 15km from Kullu town. The place is easily accessible by car and bus. Then it’s a…

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Kullu is a district in Himachal Pradesh, India. The district stretches from the village of Rampur in the south to the Rohtang Pass in the North. According to the 2011 census Kullu district has a population of 437,474, roughly equal to the nation of Malta. The district has a population density of 79 inhabitants per square kilometre (200/sq mi) . Its population growth rate over the decade 2001-2011 was 14.65%. Kullu has a sex ratio of 942 females for every 1000 males, and a literacy rate of 80.14%. Lets know about “25 Facts about Kullu district that you probably don’t know”.   1) Kullu was known as “Kulanth Peeth” which means “end of the habitable world“. It literally means that it is a  place or Peeth where all dharmic tradition and their knowledge ends. 2) Kullu town was known as “KulutaDesh” in Ancient Granths. 3) In Vedic Sahitya “KulutaDesh” was known as “Gandharvo…

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KamruNag is one of the best destinations in the Indian state of Himachal Pradesh . The place is less highlighted on National level but is an ideal place to trek. Surprisingly, Kamrunag is not even listed well in the official tourism websites of Himachal Pradesh. There are multiple reasons to visit this place and so lets talk about “KamruNag: A paradise with a treasure worth billions“.  “It is advisable to visit KamruNag during summers for one’s own safety as it experiences heavy snowfall during winters. The KamruNag lake is completely frozen in winters and only experienced trekkers should risk hiking during this time of year.”  Mythological Significance: Mahabharata mentions Devta KamruNag as “Ratan Yaksh” and was the greatest warrior in the whole world. He was a self tought warrior and decided to fight along with the weaker side in the battle of Mahabharta. Lord Krishna was aware of the fact that it…

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 Himachal Pradesh is called Devbhoomi which means “Land of God“. There are numerous temples and sacred places in this beautiful little heaven. Each village has their own deities whom they worship and they are considered in every crucial happenings. We will take you on a journey where we will talk about the popular and historically important religious places of Himachal Pradesh one by one. This time we will be talking about “PaudiWala: the second ladder to Heaven built by Ravana“. Mythological Significance: It is believed that once Lord Shiva bestowed Ravana the wish to become immortal due to his immense austerity on just one condition if he could make 5 ladders to Heaven (स्वर्ग की सीढ़ी) in a single day. So he started from the ‘Har Ki Pauri‘ at Haridwar which became the first ladder.  Then he made this second ladder which is now known as ‘PaudiWala‘. The 3rd ladder was at  ‘Chureshwar Mahadev‘ or…

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