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Category Archives: Culture

Well Done Music Festival is first Music Festival of its kind to take place in Himachal Pradesh. As the name goes, the main motive behind organizing this festival is to celebrate and share the achievements and progress made in the field of music by Himachali artists. Here are 6 reasons why you shouldn’t miss the Well Done Music Festival 1. The festival will be the first of its kind in Himachal. Well Done Music Festival is going to take place at Mandi is a bold initiative by Zenas Productions which is based out of Mandi. Mandi town is a perfect spot for such an event as it lies at a perfect distance from major towns of Himachal like Manali, Kullu, Shimla and Solan. The festival will be a grand party where crowd will get to enjoy and experience a world of different music genres coming together at the very same venue.…

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कांगड़ा जिले का मुख्यालय धर्मशाला है। जिसकी समुद्र तल से ऊंचाई 1597 मीटर है। इसका क्षेत्रफल 5739 वर्ग किलोमीटर है। जनसंख्या के हिसाब से कांगड़ा हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा जिला है| कांगड़ा जिले के कुछ आंकड़े: जनसंख्या 15,07,223 लिंग अनुपात 1013 जनसंख्या घनत्व 263 साक्षरता दर 86% कांगड़ा का इतिहास कांगड़ा को पुराने समय मे त्रिगर्त नाम से जाना जाता था। यह हिमाचल की सबसे पुरानी रियासत थी जिसकी राजधानी नगरकोट थी। त्रिगर्त रियासत की स्थापना सुशर्माचंद्र ने की थी। सुशर्माचंद्र ने ही नगरकोट किले का निर्माण करवाया था। त्रिगर्त रियासत पर काफी आक्रमण भी हुए जो इस प्रकार है: 1009ई. में महमूद गजनबी ने आक्रमण किया। 1337ई. में मोहम्मद बिन तुगलक ने आक्रमण किया। 1365ई. में फिरोजशाह तुगलक ने आक्रमण किया।1540ई. मे शेरशाह सूरी ने आक्रमण किया और 1620ई. मे जहांगीर ने कांगड़ा के किले पर आक्रमण किया। 1809 में संसारचंद और महाराजा रणजीत सिंह के बीच ज्वालामुखी संधि…

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As you all know that Himachal Pradesh is well known for its natural beauty, rich culture and tourism ; Besides this, the Youth of Himachal Pradesh is quite unique too. They are respectful, fashionable, helpful, nature lover and very friendly. Now let us tell you 10 interesting things about youngsters of Himachal Pradesh which makes them unique. 1. Travelling : With no qualms, traveling is what the Pahadis do best. Whether it is a trip to Malana-Kasol or a plan to visit Goa, they travel more often. When it comes to trekking to some Pass or a religious place, they will visit the same place 100 times but will never get bored of it. 2. Style or Fashion : Pahadis don’t always follow trends, their styles is quite often self made. Moreover they have their own walking-talking styles and can be distinguished easily because of their unique personality. 3. Nati Lovers : No matter…

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हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या 68 लाख से ज्यादा है। हिंदी भाषा को आधिकारिक भाषा का सम्मान प्राप्त है तथा अंग्रेजी भाषा को अतिरिक्त आधिकारिक भाषा के रूप में जाना जाता है। अंग्रेज भाषाविद्वान G.A Grierson ने हिमाचली भाषाओं का पश्चिमी पहाड़ी भाषाओं के रूप में सर्वेक्षण किया पहाड़ी भाषा का अपभ्रश शौरसैनी है। पहाड़ी भाषा की लिपि टांकरी है। हिमाचल में 88.77% लोग( हिंदी पहाड़ी) बोलते हैं और 5.83% लोग पंजाबी बोलते हैं। पहाड़ी भाषा बोलने वालों की संख्या कम होती जा रही है तथा हम इस पर चर्चा करेंगे पर आइए पहले जानते है कि हर जिले में कौन सी तरह की पहाड़ी बोली जाती है। चंबा  चंबा जिले में चंम्बयाली बोली जाती है। चंबा जिले में स्थानीय बोलियां भी बोली जाती हैं जिनमें भटियाली , चुराही, पंगवाली और भरमौरी  है। बिलासपुर बिलासपुर जिले में मुख्य भाषा कहलूरी बोली जाती है। कहलूरी को बिलासपुरी भाषा भी कहा जाता है। यह भी पढ़े। जानिए हिमाचल प्रदेश की पर्वत…

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रक्षाबंधन या राखी एक हिंदू त्योहार है जो भारतीय उपमहाद्वीप के कई हिस्सों में मनाया जाता है, विशेषकर भारत और नेपाल में। रक्षाबंधन का अर्थ है “सुरक्षा का बंधन“। यह हिंदू कैलेंडर में श्रावण मास के पूर्णिमा दिवस पर मनाया जाता है, जो आमतौर पर ग्रेगोरी कैलेंडर के अगस्त माह में पड़ता है। यह त्योहार भाइयों और बहनों के बीच प्रेम और कर्तव्य को मनाता है। रक्षाबंधन पर, एक बहन अपनी समृद्धि और खुशी की प्रार्थना के साथ अपने भाई की कलाई पर एक राखी (पवित्र धागे) को बांधती है। यह बहन के प्यार का प्रतीक है तथा भाई उसे बदलें में एक उपहार और उसे सुरक्षित रखने का वादा देता है। चलिए अब बात करते हैं रक्षाबंधन से जुड़ी 6 ऐतिहासिक तथा पौराणिक कथाएं जो शायद आपको मालूम ना हो 1. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, इंद्राणी जो भगवान इंद्र की पत्नी थी ने जब इंद्र राक्षसों से लड़ने जा रहे…

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त्रियुगीनारायण मंदिर के बारे में वेदों में उल्लेख भी मिलता है कि यह मंदिर त्रेतायुग से स्थापित है। माता पार्वती और भगवान शिवजी के विवाह के बारे में कई पौराणिक कथाएं हैं। ऐसी ही एक कथा उत्तराखण्ड के रूद्रप्रयाग जिले के त्रियुगीनारायण नाम के मंदिर से जुड़ी हुई है। Image Source इस मंदिर में एक ज्योति हमेशा जलती रहती है। स्थानीय लोगों की मान्यता के मुताबिक इस ज्योति के सामने ही भगवान शिवजी और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मंदिर में जल रही इस ज्योति के बारे में कहा गया है कि यह त्रेतायुग से निरंतर जलती आ रही है। यह ज्योति कभी बंद नहीं होती है। मंदिर के बारे में मान्यता है कि जो लोग यहां शादी करते है उनका दांपत्य जीवन सुखी रहता है। भगवान शिवजी और माता पार्वती का ये मंदिर रुद्रप्रयाग जिले के एक सीमांत गांव में स्थित है। इस मंदिर का नाम त्रियुगीनारायण मंदिर…

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हिमाचल प्रदेश को देवभूमि भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां पर बहुत सारे देवी देवताओं के मंदिर है। जिनका अपना एक पुराना इतिहास है। यही कारण है कि हिमाचल प्रदेश अपनी वास्तु कला के लिए भी प्रसिद्ध है। वास्तु कला में हिमाचल प्रदेश को मंदिर की छत के आकार के आधार पर स्तूपाकार, शिखर, गुंबदाकार, पगौड़ा , बंदछत शैली और समतल शैली में बांटा गया है। 1) स्तूपाकार शैली Image Source इस शैली में बने अधिकतर मंदिर शिमला जिले में स्थित है। शिमला के हाटकोटी के राजेश्वरी मंदिर और शिव मंदिर को इस शैली मे बनाया गया है। जुब्बल क्षेत्र में अधिकतर मंदिर की शैली के बने हैं। ‌2) शिखर शैली   इस शैली से बने मंदिरों की छत का उपरी हिस्सा पर्वत की तरह चोटीनुमा होता है ।कांगड़ा जिले के बहुत से मंदिर इस शैली में बने हैं। कांगड़ा का मशहूर मसरूर रॉक कट मंदिर भी इसी शैली में बना है।…

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हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या में यह 5 जनजातियों का भी अपना ही स्थान तथा महत्व है। हिमाचल प्रदेश की पांच मुख्य जनजातियों में किन्नर, लाहौली, गद्दी, पंगवाल और गुज्जर आते हैं। तो आइए विस्तार में जानते हैं हिमाचल प्रदेश की पांच मुख्य जनजातियों के बारे में। 1)किन्नर जनजाति Image Source किन्नर जनजाति किन्नौर जिले से संबंध रखती है। किन्नर मुख्यत कृषक है जो जन्म से मृत्यु तक के संस्कारों को पूरा करने के लिए यह लोग लामा की सहायता लेते हैं। इनमें बहुपति प्रथा प्रचलित है। यह लोग बौद्ध धर्म को मानते हैं। 2) गद्दी जनजाति Image Source Image Source यह जनजाति हिमाचल प्रदेश की सबसे प्रमुख जनजाति है। यह जनजाति मुख्यतः कांगड़ा जिले के बर्फीले क्षेत्रों और चंबा जिले से संबंध रखती है। यह लोग हिंदू धर्म को मानते हैं। गद्दी राजपूत लाहौर से आकर यहां बस गए। इनके मुख्य देवता शिव है। कैलांग में पाए जाने वाले गद्दी जनजाति के देवता दराती देवता है।…

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हिमाचल प्रदेश (शाब्दिक रूप से “हिमपात भूमि) यह उत्तरी भारत में स्थित भारत का एक राज्य है। यह उत्तर में जम्मू और कश्मीर, पश्चिम में पंजाब और चंडीगढ़, दक्षिण-पश्चिम में हरियाणा, दक्षिण-पूर्व में उत्तराखंड और पूर्व में तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र स्थित है। पुराने समय में हिमाचल प्रदेश पांच महत्वपूर्ण रियासते थी जिसमें जिसमें कहलूर, हूण्डर, महासू, त्रिगर्त, कलिंद, कुलुतादेस , सुकेत  मुख्य रियासते थी। 1) त्रिगर्त एक प्राचीन हिमाचल की सबसे बड़ी रियासत थी जिसे आज के समय में कांगड़ा कहा जाता है। इस रियासत में मुख्यतः कांगड़ा ऊना और हमीरपुर का भाग आता था। Image Source 2) कलिंद प्रदेश प्राचीन हिमाचल की वह रियासत थी जो महासू शिमला से लेकर अंबाला हरियाणा और उत्तराखंड के गढवाल तक फैली थी। कलिंद प्रदेश वर्तमान समय में सिरमौर के आसपास कहां जा सकता है।   3) हूण्डर रियासत प्राचीन हिमाचल की रियासत थी जो हरियाणा और पंजाब के सीमावर्ती इलाकों को छुूती थी हूण्डर रियासत वर्तमान समय में सोलन के…

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KamruNag is one of the best destinations in the Indian state of Himachal Pradesh . The place is less highlighted on National level but is an ideal place to trek. Surprisingly, Kamrunag is not even listed well in the official tourism websites of Himachal Pradesh. There are multiple reasons to visit this place and so lets talk about “KamruNag: A paradise with a treasure worth billions“.  “It is advisable to visit KamruNag during summers for one’s own safety as it experiences heavy snowfall during winters. The KamruNag lake is completely frozen in winters and only experienced trekkers should risk hiking during this time of year.”  Mythological Significance: Mahabharata mentions Devta KamruNag as “Ratan Yaksh” and was the greatest warrior in the whole world. He was a self tought warrior and decided to fight along with the weaker side in the battle of Mahabharta. Lord Krishna was aware of the fact that it…

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