उत्तराखंड के इस गांव में हुआ था शिवजी और पार्वती का विवाह

त्रियुगीनारायण मंदिर के बारे में वेदों में उल्लेख भी मिलता है कि यह मंदिर त्रेतायुग से स्थापित है।

माता पार्वती और भगवान शिवजी के विवाह के बारे में कई पौराणिक कथाएं हैं। ऐसी ही एक कथा उत्तराखण्ड के रूद्रप्रयाग जिले के त्रियुगीनारायण नाम के मंदिर से जुड़ी हुई है।



उत्तराखंड के इस गांव में हुआ था शिवजी और पार्वती का विवाह
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इस मंदिर में एक ज्योति हमेशा जलती रहती है। स्थानीय लोगों की मान्यता के मुताबिक इस ज्योति के सामने ही भगवान शिवजी और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मंदिर में जल रही इस ज्योति के बारे में कहा गया है कि यह त्रेतायुग से निरंतर जलती आ रही है। यह ज्योति कभी बंद नहीं होती है।

मंदिर के बारे में मान्यता है कि जो लोग यहां शादी करते है उनका दांपत्य जीवन सुखी रहता है। भगवान शिवजी और माता पार्वती का ये मंदिर रुद्रप्रयाग जिले के एक सीमांत गांव में स्थित है। इस मंदिर का नाम त्रियुगीनारायण मंदिर है।

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त्रियुगीनारायण मंदिर के बारे में वेदों में भी उल्लेख मिलता है कि यह मंदिर त्रेतायुग मे स्थापित हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती के “सती” रूप में पुनर्जन्म हुआ था। जन्म के बाद सती भगवान शिवजी की आराधना करने लगीं और अपनी पूजा से शिवजी का मन जीत लिया।

माता पार्वती ने यह पूजा त्रियुगीनारायण के करीब पांच किलोमीटर दूर गौरीकुंड में की थी। इसके बाद दोनों का त्रियुगीनारायण गांव में विवाह संपन्न हुआ।
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केदारनाथ धाम रूद्रप्रयाग जिले (उत्तराखण्ड) में स्थित है।
त्रियुगीनारायण का मंदिर केदारनाथ से 19-20 किलोमीटर पहले गंगोतरी, बूढ़ाकेदार सोनप्रयाग के रास्ते में पड़ता है। हर साल इसे मई से अक्टूबर महीने के बीच में आम दर्शनार्थियों के लिए खोला जाता है।
सोर्स:- जनसत्ता

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